Saturday, October 9, 2010
सानिया की चुक
Friday, September 3, 2010
हजारों लोग जख्मी

कल आपने दिन भर खब़रियां चैनल में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम देखी होगी... कभी दिल्ली से, कभी मुबई से, तो कभी नंद की नगरी मथुरा से लाइव तस्वीर।
मैं बात कर रहा हुं मुंबई के गोपीयों की जो मटकी फोड़ में लगे रहे कभी किसी दल ने कोशिश की तो कभी किसी ओर
दल ने, उंचाई पर जाते कोशिश करते और गिर जाते मगर हौसला किसी ने नहीं हारी और लगातार गोपालों की सेना मटके के पास जाने की कोशिश करती रही ।इसी कोशिश में लगभग हजारों लोग जख्मी हो गये किसी का हाथ टूटा तो किसी का पांव, किसी का सर फूट गया लेकिन हौसला वही रहा.. जोश वही था। ये अगर भक्ति हैं तो ऐसी भक्ति को सलाम और अगर दिखाआ तो हमें बचना होगा ?
Sunday, August 8, 2010
15 अगस्त क्या है ?
Friday, July 23, 2010
कहा जा रहे है हम
अज़ीबोंग़रीब हो गई हैं इसांनियत, हम बस गिरते जा रहें है... हमें सब चिजों की फिक्र हैं... लेकिन जिस बात की फिक्र नहीं हैं वो है अपने चरित्र की। कल मेट्रों में एक व्यक्ति अचानक से दूसरें व्यक्ति पर चिल्ला उठा बहन........ लड़की खड़ी हैं दिख नहीं रही हैं क्या ? मैं दरवाजे की तरफ जा रहा हुं भाई दूसरे व्यक्ति ने कहा ....पहला व्यक्ति फिर बोल उठा तेरे जैसे को मैं खुब समझता हुं साले आंखे मत दिखा पटक के मारुंगा ... दूसरा लड़का सर छुका कर मेट्रों के दरवाजे की तरफ चला गया। मैं और मेरा मित्र स्वदेश भी उसी जगह थे हमें हंसी आ गई हमें लगा लड़का अपनी गर्लफ्रेन्ड से नाराज हैं और गुस्सा दूसरे लड़के पर दिखा रहा है, जब अगला स्टाप(STOP) आया तो एक विदेशी लड़की हमारे सामने आकर खड़ी हुई ना जाने वो दूसरा लड़का फिर कहा से आ गया और उस विदेशी लड़की के सामने से करीब जाने लगा लड़की पिछे जाने लगी ये उसके करीब जाने लगा सभी कोई देख रहें थे मगर बोलने वाला कोई नहीं था मैं और स्वदेश ने आंखो ही आंखो में बात की और उस व्यक्ति को रोकने के लिए सोचे उस से पहले ही वो उस लड़की के ओठ के करीब पहुंच गया ये लगने लगा था की वो चुमने वाला हैं (कपड़ा पहने ही बलात्कार कर देगा) तभी मैंने उस व्यक्ति को पिछे खिंचा वो हड़बड़ा सा गया उसने कहा मु॥मु॥मुझे उतरना हैं तो उतर जा बदमाशी क्यों कर रहें हो नेक्स्ट स्टेशन पर वो उतर गया उस विदेशी लड़की ने हमें थैंगक्स कहा और चेहरे पर अजीबोगरीब भाव लाई.... जब हम मेट्रो से उतरे तो उसी व्यक्ती के बारे में बात कर रहें थे बात करते करते घर पहुंच गए और फिर भूल गए। बगिया के दोस्तों ऐसा आपके साथ भी हो सकता हैं सावधान रहे..?
Saturday, June 5, 2010
आम आदमी जाए तो कहा जांए

आमदिन हमें सुनने में मिलता है कि दिल्ली में ब्लूलाईन बस या डी.टी.सी बस ने किसी व्यक्ती को कुचला। रैल को नकसलीयों ने उड़ा दिया। एयरप्लेन रनवे पर फिसला। ऐसे में आम आदमी सफर करे तो कैसे करे। खैर सफर जब सफ़र बन जाए तो क्या किया जा सकता है।
दिल्ली मैट्रो मे़ अकसर समय में फैर बदल होता रहता है। 15 मिनट बाद आने वाली मैट्रो 7 मिनट बाद भी आ सकती है और 4 मिनट बाद आने वाली मैट्रो 15 मिनट बाद भी आ सकती है।कभी-कभी बैलगाड़ी की स्पीड भी संभव है, जहां हर सैकेण्ड की कीमत है वहां ऐसी लापरवाही आखिर क्यों ?
B.M.W. पर दौलतमंद का शहज़ादा कब किसी आम आदमी को कुचल कर चला जाए कहना मुशकिल है। कब कोई बाईक सवार को कारसवार ठोक दें और कार सवार पर केस भी दर्ज न हो ऐसा मुम्किन हैं। जिनका घर खुला आसमान है और पलंग फुटबाथ उन पर कब किस एक्टर या रहिशजादें की गाड़ी उन पर चल जाऐं कहना मुस्किल हैं। आखिर आम आदमी जाए तो कहा जाए ?
Saturday, March 6, 2010
वो पहला पैग

उपयुक्त बात इस लिये बताना जरुरी था क्योंकि कल सब्जी मार्केट में
मुझे आंटी मिली थी (ये मुलाकाता हमारी तीन साल के बाद हुई थी ) आंटी ने मेरा हालचाल जाना उसके बाद जब मैंने अंकल के बारे में जानना चाहा तो उन्होने कहा 6 महीने से अंकल Hospital में हैं शराब अधिक पिने से उनके दिल में पस जमा हो गया है और अब डॉ. दिल में छेद होने की बात कह रहें हैं.... 5 लाख खर्च हो चुका है पता नहीं आगे क्या होगा आंटि के आखों में आंसू आ गये । फिर मैने बात पलटने के लिए आंटी से उनके लड़के के बारे में पुछा थोड़ी हंसी के साथ उन्होने कहा की अब तो वो स्कुल में पढ़ाने लगा हैं। उसके बाद मैंने कहा आंटि कल मैं अंकल से मिलने आता हुं... और वहां से अपने रुम के लिए चल दिया रास्ते मैं सोच रहा था की काश अकंल ने वो पहला पैग नहीं पिया होता । काश....
Sunday, August 16, 2009
I like you as 'Q' like 'U'.

अंकल के स्वस्थ दिखने का राज प्रतिदिन का एक्सरसाइज है। हां ये अलग बात है कि चाचा को लोग असमाजिक भी कहते हैं क्योंकि वो किसी के यहां...किसी पार्टी में या पूजा-पाठ में जाना पसंद नहीं करते। सिर्फ काम के सिलसिले में लोगों से मिलते – जुलते हैं।
अकंल दिल्ली के होटल ताज में ठहरे हुए थे और मेरे काफी आग्रह करने पर मेरे यहां आए। आने के बाद मुझे पता चला कि वो आज पार्टी में जाने वाले हैं ...मैं काफी आश्चर्यचकित था। क्योंकि मेरी जानकारी के अनुसार अंकल कभी भी पार्टी में जाना पसंद नहीं करते ...। मैने तड़ाक से पूछा चाचा आप बिजनेस के सिलसिले में पार्टी जा रहे हैं... वो बोले नहीं ...और चुप हो गए। फिर नास्ता कर अंकल मेरी बेटी के साथ खेलते रहे और हमारे बीच बातें होती रहीं। कुछ देर के बाद वो होटल लौट गए। वैसे भी आज मेरा Weekly off है मैं कुछ घरेलु काम में लग गया। रात दस बजे अचानक से अंकल का फोन मेरे पास आया फोन में उन्होने सिर्फ यहीं कहा कि मेरे होटल में आ सकते हो तो आ जा और फोन काट दिया। मैं तैयार हो कर 11 बजे होटल ताज पहुंचा। सुबह जितने तरोताजा अंकल दिख रहे थे अब उतना ही चेहरा थका हुआ और मायूस लग रहा था। मैंने पूछा क्या हो गया चाचा वो बोले बस मन नहीं लग रहा था..तुझे बुला लिया।
पार्टी नहीं गऐ क्या ?
गया था मगर वापस आ गया?
चार - पॉच मिनट हम दोनों शांत थे... फिर मैं बात को आगे बढ़ाते हुए कहा काजल(मेरी पत्नी ) आपकी काभी तारीफ कर रही थी और आपके घर आने से काफी खुश थी। उतने में अंकल रोने लगे...मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि उनसे क्या कहुं हिम्मत कर के बोला क्या हो गया अंकल आप ऐसे क्यों रो रहे हो plzzzz चुप हो जाओ । वो बोले बेटे आज जब मैं तुम्हारे यहां गया तो बहुत अच्छा लगा। आज मेरे भी बच्चे तुमसे होते मगर...? सुन्दर चाचा आखिर बात क्या हो गई...पूरी बात तो पता चलें.. श्याम जिस पार्टी में तुम्हारा चाचा गया था वो एक 25 वीं. सालगिरह की पार्टी थी। जिस लड़की कि 25 वीं सालगिरह आज मनाई गई हो सकता था कि ये सालगिरह मेरे साथ होता। ये बात सुनकर मेरे दिमाग में मानों बम फट गया अब समझ में आया इन्होंने शादी क्यों नहीं की। मैंने INTREST लेते हुए पूछा बात क्या हो गयी थी अंकल...। बेटे बात ये है कि जिस लड़की कि आज सालगिरह है उसका नाम बबीता है। बबीता और मैं पड़ोसी थे बचपन से लेकर जवानी तक मैंने सिर्फ और सिर्फ उसी को चाहा अचानक से एक दिन मुझे पता चला कि उसकी शादी की बात चल रही है मैंने उसको एक LETTER लिख कर भेजा जिसमें लिखा था I like you as ‘Q’ like ‘U’. लेकिन उसका जवाब नहीं आया और उसकी शादी हो गई। फिर मैंने हजारीबाग छोड़ दिया और बैंगलुरू में बस गया। अचानक से एक Official Meeting में 25 वर्षों के बाद बबीता और उसका पति मुझे मिला। बबीता मुझे पहचान गई। और उन्होंने मुझे Delhi सालगिरह पर बुलाया। पार्टी में जाने के बाद पता चला कि बबीता भी मुझे चाहती थी। ये बात उसने अपने पति को भी बता दिया था। मैंने जब Letter की बात उससे पूछा तो उसने बताया कि उसने पत्र पढ़ा था I like you as ‘Q’ like ‘U’. जिसका मतलब उसने समझा था कि मैं उसे चाहता हूं मगर प्यार नहीं करता। जिसके बाद उसने शादी कर ली। मैं चौंकते हुए पूछा चाचा आपने जो लिखा था उसका हिन्दी क्या था ...? बेटा उसका हिन्दी था मैं तुम्हें इस तरह पसंद करता हूं या चाहता हूं जिस तरह ‘Q’ चाहता हैं ‘U’ को । मैंने पूछा कैसे...? चाचा ने बताया Alphabet में A to Z एक ऐसे समाज की तरह है जिसमें ‘Q’ पसंद करता हैं ‘U’ को ।‘Q’ की दीवानगी इस तरह की है कि डिक्शनरी में कोई शब्द ऐसा नहीं हैं जो ‘Q’ से बने और उसके साथ ‘U’ ना हो जैसे-Queen, Question etc. मैं सुनता ही रह गया। जब उनकी बात खत्म हुई तो मैंने कहा इसका अर्थ आपने उनको(बबीता) बताया उन्होंने कहा नहीं। मैं कोशिश कर रहा था उनको समझाने की छोड़ो अंकल अब पछताने से क्या होगा 10-15 मिनट समझाने के बाद मैं घर के लिए चल दिया रास्ते भर उन्हीं के बारे में सोचता रहा...।
Sunday, July 12, 2009
देश का सबसे बड़ा नेता कौन?



राजेन्द्र,सुधांशु और आशुतोष थे।खैर दोस्तों के लिए दो शब्द...रविन्द्र चेन स्मोकर है....और किसी की बातों को पकड़ कर लपेटने लगता हैं...।राजेन्द्र अखबार का कीड़ा है बस अखबार मिलना चाहिए....। सुधांशु और आशुतोष जैसा देश वैसा वेश...।
हम Institute की बात कर ही रहें थे की अचानक टेबल पर रखी अखबार राजेन्द्र ने उठा ली और पढ़ने लगा,पढ़ते-पढ़ते उसने कहा अच्छा बता आज देश का सबसे बड़ा नेता कौन है?एक-एक कर के बताना...,रविन्द्र मे कहा सोनिया गांधी, मैने, सुधांशु...सब ने कहा सोनिया गांधी...तभी मेरी पत्नी चाय with नास्ता ले आई और कहा बातें होती रहेंगी पहले कुछ खा - पी लो। चाय पीते हुए मैने रविन्द्र से पुछा कैसे सोनिया गांधी सबसे बड़ी नेता है Clear कर...रविन्द्र ने कहा ,सुन मनमोहन सिंह का कितना बड़ा राजनीतिक विरासत है ये सब कोई जानता है मगर फिर भी दस साल प्रधानमंत्री की कुर्सी ..., किन्तु हुक्म सोनिया जी की चलती हैं।
राष्ट्रपति (प्रतिभा पाटिल) बनाने के लिए भी एक महिला को कांग्रेस आगे लाई सोनिया जी के कहने पर,यहां तक की दलित नेता मीरा कुमार को स्पीकर बनाने में भी सोनिया के कहने पर कांग्रेस ने उनका नाम रखा था जिसे कोई पार्टी टाल नहीं सकी।
सुधांशु ने कहा राष्ट्रपति और स्पीकर बनने में यें(सोनिया गांधी) बड़ी नेता कैसे हो गई।
रविन्द्र ने कहा तेरे हिसाब से भी तो सोनिया जी बड़ी नेता है तु बता कैसे...? सुधांशु तुम कभी डुबते नाव की सवारी करना पसंद नहीं करोगे...।जब ऐसा लगने लगा की कांग्रेस का अस्तित्व खत्म होने के कगार पर है तब काग्रेंस की बागडोर संभाल कर इस बुलंदी पर लाने वाली सोनिया गांधी ही हैं।इतना ही नहीं जब BJP और अन्य पार्टीयों ने विदेशी महिला का नारा जोर शोर से उठाया तो अचानक से एक सरदार को प्रधानमंत्री बना कर सब को सन करने वाली सोनिया गांधी ही थी।
इससे पहले की मैं कुछ कहता मेरी पत्नी खाने के लिए बोल गई साथ में हंसते हुए ये कह गई की यहां मेरा हुक्म चलता है ना की सोनिया गांधी का।मैनें कहा दोस्तो चल के खाना खा लो नहीं तो दुबारा आओगे तो चाय भी नसीब नहीं होगा और फिर बड़े मजे से हम सब हंसते हुए खाना खाने लगे...।
Thursday, June 25, 2009
बरसो रे मेघा बरसो!

जब सरकार ने अपना काम शुरू किया तो आम जनता कैसे चुप बैठती उसने भी अपनी पारंपरिक उपायों को अजमाना शुरू कर दिया है इसी क्रम में नागपुर में बुधवार को मेंढ़क और मेंढ़की की शादी रचाई गयी। ऐसा माना जाता हैं कि पूरे रीति-रिवाज से मेढ़क की शादी की जाए तो वर्षा जल्द होगी...।कुछ दिन पहले ही औरतों ने मिल कर खेतों में हल जोता। कुछ तो यमुना नदी की पुजा अर्चना में लगे है तो कुछ इन्द्र देव को मनाने में लगे हैं।नेता भी पिछे नहीं है जहां जनता की भीड़ और मिडीया की उपस्थिती है वहीं वो पुजा कर रहैं है या तो चादर चढ़ा रहे हैं।
उपाय भी हो रहे है... और निर्देष भी जारी कर दि गई है ये अलग बात है कि आम जनता जो की घर में बैठ नहीं सकती, जिसे दो रोती कमाने के लिए तपती धुप में निकलना पड़ता हैं वो अपने लिए क्या उपाय करे...वो गरीब कहा रात – दिन बिताए जिसके लिए उसका घर खुला आकाश हैं आखिर कब बरसेगी मेघा...बरसो रे मेघा बरसो...!
Sunday, April 5, 2009
अतिथि देवो भव:


भारत में अतिथियों को भगवान माना जाता हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पर्यटन विभाग ने अतुल्य भारत अभियान चलाया...साथ ही अतिथि देवो भवः कहा गया। भारत में लाखों की संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं। पर्यटन के क्षेत्र में आय का अच्छा स्त्रोत होते हैं पर्यटक। पर कुछ असामाजिक तत्वों के कारण भारतीय पर्यटन को नुकसान उठाना पड़ता हैं और भारत की छवि धूमिल होती है। इसका मुख्य कारण विदेशी महिला पर हुए यौन हमले हैं चाहें वो समुद्री तटों पर विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर सवाल झेल रहे गोवा के कैवलोसिम बीच हो या तीर्थनगरी पुष्कर में विदेशी महिला के साथ छेड़छाड़ का मामला हो या केरल या उत्तर प्रदेश में भी पर्यटको के साथ छेड़खानी के मामले सामने
आते रहती हैं ...। सितम्बर 2008 में मेरठ की चलती हुई बस में एक विदेशी युवती से छेड़छाड़ की गई। ऐसे लोग भारत की जिस छवि को अपने मन में लेकर यहां आई होगीं,निश्चित रुप से वह जाते समय बदल गई होगी । मुम्बई,दिल्ली,मद्रास, पुणे इत्यादि भारत के लगभग सभी राज्यों में विदेशी महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटना सामने आते रहती हैं।जिससे भारत का सर शर्म से झुकता रहा हैं। सिर्फ छेड़छाड़ ही नहीं बल्कि जब वो किसी वस्तु को खरीदने जाते है तो उनसे उस वस्तु का दाम बढ़ा कर लिया जाता हैं। कुछ असामाजिक तत्वों के कारण विदेशी पर्यटक भारत आने से कतराने लगे हैं। क्या ऐसी धटनाओं से अतुल्य भारत और अतिथि देवो भवः का सपना साकार हो सकता है? क्या आमिर के विज्ञापन से लोग जाग सकेंगे..अतिथि देवो भवः ?
Tuesday, December 23, 2008
आम आदमी की सोच ! “गांधी और बुश”

जब मैंने बात में इंटरेसट लिया तो पहला व्यक्ति कह रहा था आज भी लोग गांधी जी को सबसे पहले सलामी देते हैं..। दूसरा कैसे ? पहला अरे यार जब भी कोई विदेशी नेता भारत आता हैं तो सबसे पहले राजघाट जरूर जाता हैं।तीसरा व्यक्ति गुस्से में बोला छोड़ो यार हम लोग उनके जाने से अपनी इज्जत देखते हैं जबकि ऐसा हैं नहीं ।जब ज़ॉर्ज बुश आने वाला था तब कुत्तों से छानबीन कराई गयी थी, राजघाट के अंदर – बाहर ये कहकर की सुरक्षा के लिए जरूरी था। छोड़ो यार अभी मुम्बई हमले में पाकिस्तान का हाथ होने के सबुत सारे चैनलों पर दिखाये गए क्या हुआ और भारत हाथ में हाथ देकर बैठा है आखिर क्यों ? भारत के प्रधानमंत्री अगर बुश होते तो....? पहले सज्जन बोले अगर बुश होते तो पाकिस्तान की तो ... कर देता..। सबने कहा छोड़ों यार तुम तो सिरीयस हो गये। माहौल कुछ पल के लिए शांत हो गया...सब चुप थे कि अचानक बस ने ब्रैक मारा सब आगे की तरफ गिरते- गिरते संभले..। कुछ देर के बाद हम लक्ष्मी नगर में उतर कर आपस में बात करते हुए घर की तरफ जा रहें थे ।
दोस्तों मुझे पता हैं कि जो लोग आपस में बातें कर रहे थे वो घर में जाएंगे और अपने- अपने परिवार की खुशियों में खों जाएंगे... कोई भी इस बारें में नहीं सोचेगा ।क्या आप भी .....?
Monday, September 8, 2008
जन्म दिन मुबारक
Monday, September 1, 2008
बच्चों की पाठशाला

आज सुबह भी बच्चों की भिड़ बस में आई। में अपनें ख्यालों में खोया ही था कि बच्चों की गुंज मेंरे कानों में पड़ने लगी...तेरी मॉ की .....,तेरी बहन की......,आपस में हंसते हुए बच्चें इस तरह से बातें कर रहें थे जैसे उन लोंगो ने तीर मार लिया हो ....खैर..अरे ये क्या बस कंडक्टर ने कुछ गलती कर दी..,और बच्चे इस तरह से उस कंडक्टर पर टूट पड़े जैसे उसने बहुत बड़ी गलती की हो ...साले ...कमीने ...तेरी मॉ की ......तेरी ... उफ गाड़ी में बैठे सभी लोग खास कर बुजु्र्ग और महिलाऐं शर्मसार हो गयी पर बच्चों को तो अपनी तेजी दिखानी थी....फिर मौका कहा मिलता । मेरी जिज्ञासा हुई की पुरी बात पता करु तो आगे सिट पर बैठे सज्जन से धीरे स्वर में पुछा भाई साहब पुरा वाक्या क्या हैं उन्होंने बताया अरे कुछ नहीं कंडक्टर बेचारे ने बच्चों से टिकट लेने के लिए कहा उसी में बच्चें उसे डराने लगे। एक स्टूडेन्ट कह रहा था तू गोल चक्कर गाड़ी पार कर के तो दिखा अकेला कंडक्टर उनसे घिरा पड़ा था की तभी एक सज्जन चिखने लगे अरे चुप हो जाओ भगवान के लिए चुप हो जाओ..मेरे भी तुम जैसे बच्चे हैं में भी उन्हे पैसे देता हूँ तुम्हारे माता पिता भी पैसे देतें होंगें फिर तुम लोग टिकट क्यों नहीं लेते मार खाकर घर जाना अच्छा लगता है, तुम्हें... हमसे पुछो जब बेटा पीटकर आता है, तो कैसा लगता हैं...अचानक से बस में सब शान्त हो गए सज्जन बोलते रहे....।
सारे बच्चें शान्त थे की थोड़ी खोमोशी के बाद एक बच्चा बोलता है बुढ़ा तो स्टाट हो गया और सारे बच्चें एक साथ हंस पड़े..। इसी बीच गोल चक्कर आ गया और बच्चों की भिड़ उतर गई । बगीया के दोस्तो मुझे लगा की ये बात आप तक भी पहुँचनी चाहिए..।
आपसे और समाज से एक प्रश्न भी है ... हमारे देश के भविष्य कहा जा रहें है ...कौंन सा पाठ पढ़ा जा रहा है पाठशाला में....।
Friday, August 22, 2008
ओलंपिक में तीन पदक भारत

जरा याद कीजिए जब हम सब ने सुना की भारत के अभिनव बिन्द्रा ने बीजिंग ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीत लिया हैं..तो हम सभी का सिर गर्व से ऊंचा उठ गया ..हर हिन्दुस्तानी फक्र कर रहा है.. जैसे पदक जीतने वाला वो खुद हो।
फिर बारी आयी मुक्केबाजों की ....एक गोल्ड पा चुका भारत अब और पदकों की उम्मीद सजा बैठा ......इनमें 54किग्रा वर्ग में अखिल कुमार, 75किग्रा वर्ग में विजेंद्र और 51 किग्रा वर्ग के जितेन्द्र थे। जिसमें सिर्फ बॉक्सर विजेंदर कुमार का कांस्य पदक पक्का हो गया. बाकि हार गए ....लेकिन हार कर भी वो देश को एक नई सोच दे गए.....वो उस मीडिया का भी ध्यान खींचने में सफल रहे जो देश में लोगों को हीरो बनाता है।कम से कम क्रिकेट के अलावा भी किसी खेल की बात हुई। और उसके बाद बारी आयी कुश्ती की ...... सुशील कुमार ने नया इतिहास रचा ....1952(केडी जाधव ने कांस्य पदक जीता था।) के बाद कुश्ती में भारत के सुशील कुमार ने कांस्य पदक जीत लिया।
सभी सूरमाओं पर रुपयों की बौछार हो गई..आने वाले समय में भी ओलंपिक में भारत को पदकों की उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। क्योंकि भारत की तरफ से 56प्रतिभागी ओलंपिक में अपना प्रदर्शन करेंगे। ये अलग बात है कि हम लोगों को जिनसे भी उम्मीद थी वो तो टांय टांय फिस्स हो गये । जैसे 2004 के सिल्वर मेडलिस्ट राज्यवर्धन सिंह राठौर(निशानेबाजी), दस मीटर एयर पिस्टल समरेश जंग, टेनिस - पुरुष युगल लिएंडर पेस और महेश भूपति या टेनिस - महिला एकल सानिया मिर्जा, एथलेटिक्स - लंबी कूद अंजू बॉबी जार्ज, या बैडमिंटन - महिला एकल सायना नेहवाल।
अब प्रश्न ये उठता हैं कि भारत जिसकी अबादी एक अरब से भी अधिक है उस देश में क्या सिर्फ 56 खिलाड़ी ही ओलंपिक में भाग ले सकते है या अधिक ? जिनसे हमें उम्मीद थी वो क्यों नहीं चले ? यहॉ ये बताना दिलचस्प होगा कि जब विजेंदर, जितेन्द्र और सुशील ओलंपिक में दूसरे प्रतिभागी से भिड़ रहे थे उसी समय भारत में पूजे जानें वाले खेल क्रिकेट की सुध किसी ने नहीं ली। हॉ यहां मीडिया को धन्यवाद जरूर करना होगा जिसने क्रिकेट को छोड़कर ओलंपिक में ज्यादा ही ध्यान दिया।कम से कम इसी बहाने अगले ओलंपिक में हम कुछ और बेहतर कर पाएंगे। और देश में अन्य खेलों के लिए माहौल भी तैयार होगा।
एक नज़र तीनों के Medal record पर
अभिनव बिन्द्रा Men's shooting
Olympic Games- Gold -2008 Beijing-Men’s 10 m air rifle
ISSF World ShootingChampionships -Gold-2006Zagreb -Men’s 10 m air rifle
Commonwealth Games -Silver-2002 Manchester-Men’s 10 m air rifle (Singles)
Commonwealth Games-Gold-2002 Manchester-Men’s 10 m air rifle (Pairs)
Commonwealth Games-Bronze-2006 Melbourne -Men’s 10 m air rifle (Singles)
Commonwealth Games-Gold-2006Melboume-Men’s 10 m air rifle (Pairs)
विजेंदर कुमार Boxing
Olympic Games-Bronze-2008 Beijing-Middleweight
Commonwealth Games-Silver-2006 Melbourne-Welterweight
Asian Games -Bronze-Doha2006-Middleweight
सुशील कुमार Frestyle Wrestling
Olympic Games-Bronze-2008Beijing-Men's Freestyle 66 kg
Commonwealth Wrestling Championship-Gold-2003 London-Men's Freestyle 60 kg
Commonwealth Wrestling Championship-Gold-2005 Cape Town -Men's Freestyle 66 kg
Commonwealth Wrestling Championship-Gold-2007 London -Men's Freestyle 66 kg
Asian Wrestling Championship -Bronze-2003 New Delhi -Men's Freestyle 60 kg
Asian Wrestling Championship-Bronze-2008 Jeju Island -Men's Freestyle 66 kg
Tuesday, August 19, 2008
मुशर्रफ का इस्तीफा 2


