Saturday, October 9, 2010
सानिया की चुक
Friday, September 3, 2010
हजारों लोग जख्मी

कल आपने दिन भर खब़रियां चैनल में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम देखी होगी... कभी दिल्ली से, कभी मुबई से, तो कभी नंद की नगरी मथुरा से लाइव तस्वीर।
मैं बात कर रहा हुं मुंबई के गोपीयों की जो मटकी फोड़ में लगे रहे कभी किसी दल ने कोशिश की तो कभी किसी ओर

इसी कोशिश में लगभग हजारों लोग जख्मी हो गये किसी का हाथ टूटा तो किसी का पांव, किसी का सर फूट गया लेकिन हौसला वही रहा.. जोश वही था। ये अगर भक्ति हैं तो ऐसी भक्ति को सलाम और अगर दिखाआ तो हमें बचना होगा ?
Sunday, August 8, 2010
15 अगस्त क्या है ?
Friday, July 23, 2010
कहा जा रहे है हम
अज़ीबोंग़रीब हो गई हैं इसांनियत, हम बस गिरते जा रहें है... हमें सब चिजों की फिक्र हैं... लेकिन जिस बात की फिक्र नहीं हैं वो है अपने चरित्र की। कल मेट्रों में एक व्यक्ति अचानक से दूसरें व्यक्ति पर चिल्ला उठा बहन........ लड़की खड़ी हैं दिख नहीं रही हैं क्या ? मैं दरवाजे की तरफ जा रहा हुं भाई दूसरे व्यक्ति ने कहा ....पहला व्यक्ति फिर बोल उठा तेरे जैसे को मैं खुब समझता हुं साले आंखे मत दिखा पटक के मारुंगा ... दूसरा लड़का सर छुका कर मेट्रों के दरवाजे की तरफ चला गया। मैं और मेरा मित्र स्वदेश भी उसी जगह थे हमें हंसी आ गई हमें लगा लड़का अपनी गर्लफ्रेन्ड से नाराज हैं और गुस्सा दूसरे लड़के पर दिखा रहा है, जब अगला स्टाप(STOP) आया तो एक विदेशी लड़की हमारे सामने आकर खड़ी हुई ना जाने वो दूसरा लड़का फिर कहा से आ गया और उस विदेशी लड़की के सामने से करीब जाने लगा लड़की पिछे जाने लगी ये उसके करीब जाने लगा सभी कोई देख रहें थे मगर बोलने वाला कोई नहीं था मैं और स्वदेश ने आंखो ही आंखो में बात की और उस व्यक्ति को रोकने के लिए सोचे उस से पहले ही वो उस लड़की के ओठ के करीब पहुंच गया ये लगने लगा था की वो चुमने वाला हैं (कपड़ा पहने ही बलात्कार कर देगा) तभी मैंने उस व्यक्ति को पिछे खिंचा वो हड़बड़ा सा गया उसने कहा मु॥मु॥मुझे उतरना हैं तो उतर जा बदमाशी क्यों कर रहें हो नेक्स्ट स्टेशन पर वो उतर गया उस विदेशी लड़की ने हमें थैंगक्स कहा और चेहरे पर अजीबोगरीब भाव लाई.... जब हम मेट्रो से उतरे तो उसी व्यक्ती के बारे में बात कर रहें थे बात करते करते घर पहुंच गए और फिर भूल गए। बगिया के दोस्तों ऐसा आपके साथ भी हो सकता हैं सावधान रहे..?
Saturday, June 5, 2010
आम आदमी जाए तो कहा जांए

आमदिन हमें सुनने में मिलता है कि दिल्ली में ब्लूलाईन बस या डी.टी.सी बस ने किसी व्यक्ती को कुचला। रैल को नकसलीयों ने उड़ा दिया। एयरप्लेन रनवे पर फिसला। ऐसे में आम आदमी सफर करे तो कैसे करे। खैर सफर जब सफ़र बन जाए तो क्या किया जा सकता है।
दिल्ली मैट्रो मे़ अकसर समय में फैर बदल होता रहता है। 15 मिनट बाद आने वाली मैट्रो 7 मिनट बाद भी आ सकती है और 4 मिनट बाद आने वाली मैट्रो 15 मिनट बाद भी आ सकती है।कभी-कभी बैलगाड़ी की स्पीड भी संभव है, जहां हर सैकेण्ड की कीमत है वहां ऐसी लापरवाही आखिर क्यों ?
B.M.W. पर दौलतमंद का शहज़ादा कब किसी आम आदमी को कुचल कर चला जाए कहना मुशकिल है। कब कोई बाईक सवार को कारसवार ठोक दें और कार सवार पर केस भी दर्ज न हो ऐसा मुम्किन हैं। जिनका घर खुला आसमान है और पलंग फुटबाथ उन पर कब किस एक्टर या रहिशजादें की गाड़ी उन पर चल जाऐं कहना मुस्किल हैं। आखिर आम आदमी जाए तो कहा जाए ?
Saturday, March 6, 2010
वो पहला पैग

उपयुक्त बात इस लिये बताना जरुरी था क्योंकि कल सब्जी मार्केट में
मुझे आंटी मिली थी (ये मुलाकाता हमारी तीन साल के बाद हुई थी ) आंटी ने मेरा हालचाल जाना उसके बाद जब मैंने अंकल के बारे में जानना चाहा तो उन्होने कहा 6 महीने से अंकल Hospital में हैं शराब अधिक पिने से उनके दिल में पस जमा हो गया है और अब डॉ. दिल में छेद होने की बात कह रहें हैं.... 5 लाख खर्च हो चुका है पता नहीं आगे क्या होगा आंटि के आखों में आंसू आ गये । फिर मैने बात पलटने के लिए आंटी से उनके लड़के के बारे में पुछा थोड़ी हंसी के साथ उन्होने कहा की अब तो वो स्कुल में पढ़ाने लगा हैं। उसके बाद मैंने कहा आंटि कल मैं अंकल से मिलने आता हुं... और वहां से अपने रुम के लिए चल दिया रास्ते मैं सोच रहा था की काश अकंल ने वो पहला पैग नहीं पिया होता । काश....