आओ अंग्रेजी सीखे!

Saturday, February 25, 2017

बस गदहा मत बनना...


चुनाव जब आता है तो लोग जानवरों को भी जान जाते है ना ना ना मैं किसी महान नेता के बारें में कुछ बोलने के ओकात में नहीं हूं भईया हा मैं बात कर रहा हूं चुनाव में होने वाले भेड़िया धसान बोलचाल कि...अरे वाह! भेड़िया भी एक जानवर है...है कि नहीं,नहीं समझे चलिए समझाता हूं... आपको यूपी चुनाव में मायावती अरे भाई साहब बीसपी की सर्वों सर्वा की बात कर रहा हूं मैं।इनका चुनाव चिन्ह क्या है जी हां सही समझे है आप हाथी.नेता आपसी लड़ाई में हो सकता है आपको गदहा बना दें पर आप मत बनना मत।ओह हो गदहा से याद आया गुजरात का गदहा आज कल यूपी में आ गया है ऐसा कई लोग बोल रहे है सुऱझित रहिएगा । हो सकता है कि इस बार का दावेदार ना हो जाए...

कई पत्रकारों ने तो गदहों को दिखाया अपने चैनलों में भी... ध्यान से देखिएगा...अरे भाई मेरी गलति ना देखो कि गदहा नहीं होता गधा होता सब चलता है आजकल लिखने में बस गदहा मत बनना... 

Monday, March 23, 2015

एक निर्भया- भारत की बेटी

भारत के इतिहास में जब भी देखा कुछ अलग सा नजर आया... हां आईने में कुछ तलाशने की जरुरत थी ठीक उसी समय संसद में राजनाथ सिंह को सांसदों को आश्वासन देते सुना, सुनने के बाद समझा की India’s daughter नाम कि एक Documentary film आ रही है.. जिसको रोकने के लिए राजनाथ बोल रहे थे तब मुझे पता चला कि BBC ने India’s daughter के नाम से 8 मार्च को documentary का प्रसारण करेगी जिसको सरकार रोकना चाहती है... मुझे लगा यस... वैरी गुड... है कोई सरकार... जो छोटी-छोटी बातों पर भी ध्यान रखती है। शाम हुआ और खबरियां चैनलों ने इस पर चर्चा शुरू की और देखते ही देखते बात सोशल मीडिया ने उस मुकाम पर पहुंचा दिया जहां हर एक बच्चा भी ये जान गया था कि 16 दिसंबर की रात निर्भया के साथ जो कुछ हुआ था उस पर एक फिल्म बन रही थी... जिसमें मुकेश सिंह ने कुछ ऐसी बातों को रखा जिसे सुन कर लोगों के रोए खड़ें हो गए ...। शायद इसलिए जावेद अख्तर ने कहा था कि इस फिल्म को लोगों के सामने आना चाहिए क्योंकि जो रेपिस्ट ने कहा है वही हमारे समाज का एक वर्ग भी बोलता है... चर्चा उस दिन की खत्म हो गई दूसरे दिन(04-03-15) भारतीय समय के अनुसार प्रात: 3:30am में बीबीसी ने फिल्म को प्रसारित कर दिया... भारत की बेटी पर बनी फिल्म रातों-रात बीबीसी कि टीआरपी बढ़ाने वाली थी इसी सोच को आगे लाते हुए इन्होंने इस फिल्म को प्रसारित कर दिया... भारत में इस फिल्म पर रोक लग गई...मगर लगभग लोगों ने ये फिल्म देखी क्योंकि ये फिल्म YouTube पर आ चुकी थी जिस पर भी ऱोक लगी... मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी.. कई जगहों पर लोगों ने इसे download  भी कर लिया था...
कुछ प्रश्न मेरे मन में आये उस फिल्म को देखने के बाद
1-                ये फिल्म काफी दिन से भारत में बन रही थी तब सरकार कहा सोई थी।
2-                जेल के अंदर कैसे इंटरव्यू लिया गया...और इतने नामी अपराधियों पर...
3-                आने वाले समय में क्या कोई जेलर या उससे संबंधीत व्यक्ति किसी पत्रकार पर विश्वास कर पाएगा और इंटरव्यू लेने देगा...
4-                YouTube को क्या भारतीय कानून का ज्ञान नहीं था जो उन्होंने इसको दिखाया...
5-                लड़की के माता पिता ने भी ये कहा कि हमें कोई दिक्कत नहीं कि ये फिल्म दिखाया जाए या नहीं दिखाया जाए मगर सवाल ये है कि अगर सरकार रोक रहीं है तो इसका प्रसारण नहीं होना चाहिए।
       अब भारत की बेटी पर टीआरपी का सौदा हो चुका है ऐसे में अब कुछ भी किया जाए कम होगा 16 दिसंबर 2012 का दिन कुछ सवाल उठाया था मगर कुछ नहीं हुआ 4 मार्च 2015 का प्रसारण भी कुछ  सवाल उठातें है जिसकों बारिकी से समझना होगा मुझे, आपको और सरकार को लेकिन होगा क्या ये सबको पता है
जय भारत !

जय भारतीय बेटियां???

Saturday, December 27, 2014

सेब ना होता तो हम आप भी ना होते!

डाक्टर ने... या आप के बड़ों ने या दोस्तों ने... कभी ना कभी ये कहा होगा कि सेब खाने से कई फायदे है। मगर हम यहां बात कर रहें है सेब के उन करामातों को जिसने बदल के रख दिया संसार को तो आइए बात करते है सबसे पहले उस सेब की जिसने मानव जाति की आबादि एक से महाशंख तक पहुंचादिया। या यूं कहे की सेब ना होति तो हम आप भी ना होते।य़े बात हंसने में जरूर लगता है पर सचाई है
हम बात कर रहें है :-
ईडन या खुल्द की कई इब्राहीमी धर्मों की मान्यताओं में वह जगह थी जहां ईश्वर ने पहले पुरुष आदम और पहली स्त्री हव्वा या ईव की सृष्टि के बाद उन्हे रखा था। इस जगह के बारे धर्मकथाओं के अनुसार ये माना जाता है कि एक सौंदर्य और शांति से भरे उद्यान के रूप में ईडन के बारे में जाना जाता है... जहां ये दोनों निर्दोष और निष्कपट चरित्र से रहेते थेकहानि यूं है कि ईडन के बगीजे में आदम और हव्वा बिलकुल अज्ञान और निर्दोष स्थिती में आनंद से बच्चों की तरह रहते थे...दोनों नग्न रहते थे और कोई शर्म नहीं अनुभव करते थे और तो और उन्हें यौन संबंधों का भी कोई ज्ञान नहीं था। ईडन(बगीजे) में एक ज्ञान का वृक्ष था उसपर लगे फल को खाने के लिए ईश्वर ने आदम और हव्वा को मना किया था ।अगर हम ईसाई मान्यता को माने तो पता चलता है कि ज्ञान के वृक्ष में एक साप रहता था...इसी साप ने हव्वा को फल खाने के लिए उकसाया और हव्वा ने आदम को फल खाने के लिए कहा ... आदम और हव्वा जो कि एक बच्चे की तरह अज्ञानी हो कर रहते थे फल को खाने के बाद अचानक से ये बड़े हो गए। और उन्हे लगा कि हम नग्न नहीं रह सकते ये सही नहीं है... और फिर उन दोनों ने वृक्ष के पत्तों को अपना वस्त्र बनाया और पहन के खुमने लगे... अचानक से एक दिन ईस्वर उधर से जा रहे थे तो ईडन में आ गए यहां पर देखा कि आदम और हव्वा दोनों वृक्ष के पत्तों का वस्त्र बना कर बहन रहे है ईस्वर को बात समक्षने में समय नहीं लगा और ईस्वर ने दोनों को उस बगीजे से निकाल दिया। तब से ईसाई मानय्ता है की मानव पापी अवस्था में संसार में भटक रहा है। दोस्तो जो ज्ञान का वृक्ष था वो सेब का ही वृक्ष था मतलब ये है कि इस संसार में मानव को लाने वाला सेब ही है। क्योकि इसी को खाने का दण्ड उन्हे पृथ्वी पर ले कर आया।

अब हम बात करते है  अपने दूसरे नयाक न्यूटन के बारें में जिनका नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। न्यूटन भौतिकविद,फिलास्फर,गणितज्ञ,खगोलशास्त्री सभी कुछ थे। कोई भी व्यक्ति जब साइंस की दूनिया में कदम रखता है तो जिसके नियमों के बारें में पढ़ना पड़ता है वो है नयूटन। न्यूटन का पूरा नाम सर आइजक न्यूटन है, इनका जन्म सत्रहवीं सदी में 25 दिसम्बर 1642 को इंग्लैण्ड के लिंकनशायर के एक छोटे से देहात वूल्सथार्प में हुआ था। न्यूटन जब मां के गर्भ में थे तभी इनके पिता का देहान्त हो गया था। इन्होनें 12 साल की आयू में ग्रामर स्कुल और 19 वर्ष की आयु में कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलिज में भर्ती हुए। ना ना ना मैं आपको उनकी जिवनी नहीं पढ़ने को कह रहा हूं ...सर आइजक न्यूटन एक महान गणितज्ञ थे, इन्हें भौतिकी का जन्मदाता भी कहा जाता था। 1665 में स्नातक की उपाधि पाने के पहले कैंब्रिज में प्लेग फैलने से न्यूटन को घर आना पड़ा जब एक दिन वो अपने बगीचे में बैठे थे तभी पेड़ से सेब को गिरते देख उन्होने सोचा कि आखिर ये सेब निचे ही क्यों गिरा वो भी सिधा ना बांये ना दांये किसी गेंद को ऊपर फेंकेते है तो वो भी नीचे आता है इससे उन्होने सोचा कि जमीन खींचती है चीजों को अपनी तरफ जिसका नाम गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत पड़ा यह विज्ञान के क्षेत्र में महानतम खोज थी। 85 वर्ष कि आयु में उनका देहांत हो गया। दोस्तो ये भी महान खोज नहीं कर बाते अगर सेब नहीं होता। मतलब हम जिस सांइस के दम पे आज 21वी सदीं में चांद तक पहुंचने का दम भर रहे है शायद ये संभव नहीं हो पाता। अगर सेब ना होता।
अब बात हमारे तीसरे नायक स्टीव जॉब्स की
क्या आपको याद है कि वीसीआर, डीवीडी और सीडी जी हां कुछ वर्षों पहले तक यही तो साधन थे हमारे इंटरटेनमेंट के। लेकिन हाथों में कई हजार गाने अपने मुठ्ठी में बंद कर घूमने का सपना जिस व्यक्ति ने साकार किया उसका नाम है स्टीव जॉब्स। महानतम आविष्कारक थे स्टीव। मोबाईल उपभोक्ताओं और संगीत प्रेमीयों को स्टीव ने एक ऐसा तोएफा दिया जो की अंतुलनीय था ।स्टीव ने नई चीज का आविष्कार तो नहीं किया मगर अपने आसपास के चीजों को ऐसा रुप दिया की चीजें बदल गईं।स्टीव पॉल जॉब्स का जन्म 24 फरवरी 1955 को सैन फ्रांसिस्को में हुआ था उनके माता जोआन शिबल और पिता अब्दुलफतह जंदाली अविवाहित थे । इसीलिए उनकी मां ने उनको पॉल और क्लैरा जॉब्स को सौंप दिया। इनके कार्यों को घ्यान दिया जाए तो सबसे पहले इन्होने स्थानीय हाईस्कूल में जॉब्स को लेट पैकार्ड के संयंत्र में पालो आल्टो में काम करने का मौका मिला। लेकिन एक साल बाद ही ये नौकरी इन्होने छोड़ दिया । इसके बाद वीडियो गेम बनाने वाली कंपनी अटारी के साथ काम किया। यहां काम करते हुए ये स्थानीय कंप्यूटर क्लब जाते रहें। इसके कुछ दिनों बाद ही स्टीव नें अपनी कंपनी अपने दोस्त स्टीफेंसन वोजनियाक के साथ मिल कर खोला और उसका नाम अपने पसंदीदा फल एप्पल पर रखा। 1974-75 में स्टीव ने एप्पल-1 नाम से एक मशीन लॉच किया। इसके बाद एप्पल 2 बनाने लगे जो की 1977 में कैलिफोर्निया का कंप्यूटर मेले में दिखाया गया। इस मशीन को बनाने में माइक मारकुला से 2.5 लाख डॉलर कर्ज लिया। और इसी पैसे से अपने दोस्त वोजलियाक के साथ मिल कर एप्पल कंप्यूटर्स नाम की कंपनी बनाई। 1984 में मैकिंटॉश बनाया। इसी समय जॉब्स कि कंपनी पैसे – पैसे को तरस रही थी और जॉब्स का व्यवहार तानाशाह जैसा हो गया था जिसका रिज्लट ये हुआ कि स्टीव को कंपनी से निकाल दिया गया। 1985 में स्टीव ने नेक्स्ट कंप्यूटर नाम से नई कंपनी बनाई। इस कंपनी एक वर्ष के अंदर एक ग्राफिक कंपनी खरीद लिया। उनके परिवार में पत्नी लॉरेन और तीन बच्चें थे इतिहास ने एक बार फिर इनको अपनी शक्ति जताया क्योंकि 1991 में विवाह के पहले प्रेम संबंधो के कारण शादी के पहले ही इनकी एक बेटी हुई।1991 में एप्पल कंपनी ने स्टीव के कंपनी को खरीद लिया और 2 साल के अंदर स्टीव को एप्पल कंपनी का CEO बना दिया गया। स्टीव ने 2 साल के अंदर कंपनी को उस बुलंदियो पर पहुंचा दिया जिसका सबको इंतजार था। 2004 में स्टीव के  अग्नाशय के   कैंसर का इलाज हुआ। इसी साल अगस्त में एप्पल के सीईओ पद से भी इस्तीफा दे दिया। 2009 में इनका यकृत बदला गया।स्टीव ने आईपॉड और आईफोन जैसे उपकरण दुनिया को दिए । आईफोन के नए मॉडल 4S के लॉच के एक दिन बाद ही 5 अक्टूबर 2011 को 3 बजे के आस पास उनका निधन हो गया। सबसे बड़ी बात ये हुआ कि स्टीव के मरने की खबर लोगों को उसी तंत्र से मिला जिसका आविष्कार उन्होनें किया था। बराक ओबामा और बील गैट्स नें भी इनके मृत्यू पर शोक व्यक्त किया। इनकी मृत्यू नें ये सोचने को मजबूर कर दिया कि आखिर अब इस संचार क्षेत्र में अब दूसरा कोई स्टीव ना होगा। दोस्तों जिस संचार के माघ्यम से आप इस स्टोरी को पढ़ रहें है वो संभव ना हो पात अगर Apple ना होता।

इस स्टोरी को जिस तरह से में दो साल से लिखना चाहता था वो लिख नहीं पाया मगर फिर भी लिखने की कोशिश की है। रिसर्च  का आधार लिया गाय...ये स्टोरी मेरे पास 2011 में मेरे भाई सौरभ (सन्नी) के द्वारा भेजे गए SMS पर आधारित है जो निम्न है।

According to bible if ever would not have dat apple
The world would not have started and if newton would not have noticed that apple we don’t have modern appliances…
And at last but not least third apple was manufactured by steve jobs who changed d way of listening music b4 we had phones
Now we iphones we have walkmns – ipod….

Monday, October 13, 2014

जन्नत बना जहन्नुम



जम्मू कश्मीर में बाढ़ से लोगों की मौत ने 55 सालों के बाद वो दर्दनाक मंजर सामने लाया जिसको सुधारना मानवीय हाथों में तो नहीं...ये पहली बार नहीं हुआ...कुदरत का कहर यहां हमेंशा 55-54 सालों में होता रहा है ...(लगभग 250-300) मौत की चीखों ने लोगों को हिला कर रख दिया.. लोगों ने अपने आप को बचाने के लिए हर उस जगह का सहारा लिया जहां उनकी जान बचने की कोई एक उम्मीद नजर आई... ऐसे में केन्द्र सरकार जिंदगी बचाने निकली और सेना के तीनों टुकड़ीयो को मिशन मेघदूत के तहत भेजा। फौज ने अपनी जान पे खेल कर कई जानों को बचाया...दूसरे राज्यों से रोजी-रोटी के लिए आए लोगों के यहां मानों मातम छा गया... किसी से भी कोई सम्पर्क नहीं हो रहा था परिजन किसी अनहोनी के दर्द से डर रहें थे...। किसी का मोबाईल नहीं लग रहा था आनें-जानें का रास्ता भी बंद था पुल टूट गए थे; ऐसे में सेना नें 16 घंटे में पुल को बना दिया।
 कई लोग पानी में फंसे थे... कई ने पत्थरों का सहारा लिया और कई ने घर के तीसरे मंजिल को सहारा बनाया। ऐसे में कुदरत ने किसी फरीयादी की फरियाद सुनी और बारिश की बुदें कम होती चली गई...नदी का पानी भी ठहर सा गया । और अब राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के पास नई कठीनाईयां सामने आई जहां बीमारी और भूखमरी नें लोगों के हौसले तोड़ चुकी थी वही सरकार इन मुसीबतों से कैसे लड़ेगी ये देखने वाली बात थी ।ऐसे में कईलोग मसीहें के रुप में सामने आए और लोगों कि मदद के लिए हाथ बढ़ाया।
लिखा है किस्मत में जख्म तो मरहम को याद क्या करना

जहां के हाकिम हो बेरहम वहां जिंदगी के लिए फरीयाद क्या करना....